संदेश

1857 के क्रांतिकारी, प्राण सुख यादव का जीवन परिचय | Pran Sukh Yadav ka jivan prichay |

चित्र
  1857 के क्रांतिकारी प्राण सुख यादव का जीवन परिचय | प्राण सुख यादव का जीवन परिचय |  नाम: प्राण सुख यादव (राव साहब)  जन्म: 1802 मृत्यु: 1888  स्थान: हरियाणा प्रसिद्ध लड़ाइयाँ: पखली की लड़ाई, प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध, द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध, मीरपुर की लड़ाई, राजौरी की लड़ाई, बारामूला की लड़ाई, धमतौर का युद्ध, गांधीगढ़ का युद्ध, जमरूद की लड़ाई, नसीबपुर की लड़ाई, मनकेरा की लड़ाई, है प्राण सुख यादव का जीवन परिचय | भारतीय सेना-नायक और 1857 की क्रांति में साथी क्रांतिकारी और सिख कमांडर हरी सिंह नलवा के मित्र थे। अपने पूर्व समय में उन्होंने खालसा सेना और फ्रांसीसी हथियारों की तरफ से लड़ाई सीखी थी। महाराजा महाराजा सिंह के निधन के बाद प्रथम और द्वितीय ब्रिटिश-सिख संघर्ष में भागीदारी की भूमिका निभाई। प्राण सुख यादव जी का जन्म 1802 में हरियाणा में हुआ था। उनके जन्म के समय उनके पिता बंगाल युद्ध में लड़ रहे थे। 5 साल की उम्र में ही अपने पिता की देख-रेख में उन्होंने युद्ध कला सीखने के साथ-साथ कुशल युद्ध रणनीतियां भी सीखीं। यह उनके पिता की शिक्षा और ज्ञान की खोह थी कि वे सत्रह साल की...

बंगाली क्रांतिकारी, प्रमोद रंजन चौधरी का जीवन परिचय | Pramod Ranjan Chowdhary ka jivan prichay |

चित्र
बंगाली क्रांतिकारी, प्रमोद रंजन चौधरी का जीवन परिचय | Pramod Ranjan Chowdhary ka jivan prichay |  नाम: प्रमोद रंजन चौधरी  जन्म: 1904, स्थान: चिट्टागॉन्ग, केलिशहर  मृत्यु: 28 सितम्बर 1927 पिता: श्री ईशान चन्द्र चौधरी  प्रसिद्धि: क्रांतिकारी प्रमोद रंजन चौधरी का जीवन परिचय |  प्रमोद रंजन चौधरी एक बंगाली क्रांतिकारी थे। उन्होंने अंग्रेज़ शासन के विरुद्ध आवाज़ उठाई थी प्रमोद का जन्म चिट्टागॉन्ग के केलिशहर में हुआ जो अब बंग्लादेश में है। उनके पिता का नाम श्री ईशान चन्द्र चौधरी था। 1920 में शिक्षा के दौरान वह अनुशीलन समिति से जुड़ गए जो कि एक क्रांतिकारी संगठन के रूप में प्रसिद्ध है। 1921 में वह असहयोग आन्दोलन से भी जुड़ गए। 1925 में चौधरी को दक्षिणेश्वर बम कांड में संदिग्ध के रूप में पकड़ा गया था और कड़ी सज़ा सुनाई गई। अलीपुर जेल में जहाँ वह बन्द थे, चौधरी ने 28 मई 1927 को भूपेन्द्र नाथ चटर्जी को मार डाला जो पुलिस के डिप्टी कमिशनर थे। इसी के कारण उसे 28 सितम्बर 1927 को फाँसी दे दी गई।

भारतीय क्रांतिकारी, प्रफुल्ल चाकी का जीवन परिचय | Prafulla Chaki ka jivan prichay |

चित्र
  भारतीय क्रांतिकारी, शहीद चौकीदार का जीवन परिचय | प्रफुल्ल चाकी का जीवन परिचय |  नाम: प्रफुल्ल चाकी पूरा नाम: प्रफुल्ल चंद्र चाकी जन्म: 10 दिसंबर 1888  स्थान: बोगुरा, बांग्लादेश मृत्यु: 2 मई, 1908  स्थान: मोकामाघाट, भारत मृत्यु का कारण: आत्महत्या पिता : नारायण राज चैकी  माता: स्वर्णमयी देवी  शिक्षा: रंगपुर जिला विद्यालय पूरा नाम: प्रफुल्ल चंद्र चाकी व्यवसाय: भारत के स्वतंत्रता सेनानी संगठन: जुगंतर प्रफुल्ल चाकी का जीवन परिचय | प्रफुल्ल चाकी भारत के स्वतन्त्रता सेनानी एवं महान क्रान्तिकारी थे। भारतीय स्वतन्त्रता के क्रान्तिकारी संघर्ष में उनका नाम अत्यन्त सम्मान के साथ लिया जाता है इनका जन्म 10 दिसम्बर 1888 को उत्तरी बंगाल के बोगरा जिले (अब बांग्लादेश में स्थित) के बिहारी गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम राज नारायण चकी और माता का नाम स्वर्णमयी देवी था। जब वे दो वर्ष के थे तभी उनके पिता जी का निधन हो गया। उनकी माता ने अत्यंत अनाथ से अनाथालय का पालन-पोषण किया। छात्रों के जीवन में ही युवाओं का परिचय स्वामी महेश्वरानंद द्वारा स्थापित गुप्त क्रांतिकारी संगठन से...

स्वतंत्रता सेनानी, प्रतिपाल सिंह का जीवन परिचय | Pratipal Singh ka jivan prichay |

चित्र
स्वतंत्रता सेनानी, प्रतिपाल सिंह का जीवन परिचय |   नाम: प्रतिपाल सिंह  जन्म: मौदहा, फर्रुखाबाद मृत्यु: 28 अक्टूबर 1986  प्रतिपाल सिंह का जीवन परिचय | प्रतिपाल सिंह भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। वह हमेशा कांग्रेस के बड़े नेताओं के संपर्क में रहते थे। पंडित गोविंद वर्ष पंत और मोहम्मद फारूक चिश्ती के वह बेहद करीबी थे और पंडित जवाहरलाल नेहरू के साथ सराय जेल में बंद थे। ठाकुर प्रतिपाल सिंह रायटर का जादूगर गांव फर्रूखाबाद जिले में मौदहा था। लेकिन पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने अपने ननिहाल कुरियाकलां को अपनी कर्मभूमि बना लिया। सबसे पहले वह 1947 में जिला परिषद के सदस्य चुने गये। 1952 के प्रथम विधान सभा चुनाव में वह जमौर विधान सभा क्षेत्र से निर्वाचित हुए। 1957 में उन्होंने कांग्रेस पार्टी से एमपी के टिकट मांगे लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्ता ने उनके टिकट कटवा दिए और उन्होंने कांग्रेस पार्टी को खत्म कर दिया। वह पार्टी से बगावत करके पेज सोसलिस्ट पार्टी से चुनावी मैदान में हैं। 1952 से 1957 तक वे जिला परिषद के अध्यक्ष भी रहे। ठाकुर प्रतिपाल सिंह जिले के ऐसे स्व...

प्रतापसिंह बारहठ का जीवन परिचय | Pratap Singh Barhat ka jivan prichay |

चित्र
प्रतापसिंह बारहठ का जीवन परिचय | Pratap Singh Barhat ka jivan prichay |  नाम: प्रतापसिंह बारहठ जन्म: 24 मई, 1893 मृत्यु: 24 मई, 1918  स्थान: उदयपुर, भारत माता: माणिक्य कंवर पीता: केसरी सिंह बारहठ  प्रतापसिंह बारहठ का जीवन परिचय |प्रतापसिंह बारहठ भारत के स्वतंत्रता संग्राम के एक महान क्रांतिवीर तथा केसरी सिंह बारहठ के पुत्र थे। इनकी माता का नाम माणिक्य कंवर था प्रतापसिंह बारहठ जन्म राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा के पास देवखेड़ा गांव में 24 मई 1893 में हुआ था। इनका प्रारंभिक शिक्षा कोटा, अजमेर और जयपुर में हुई। क्रांतिकारी मास्टर अमीरचंद से प्रेरणा लेकर देश को स्वतंत्र करवाने में जुट गए। वे रासबिहारी बोस का अनुसरण करते हुए क्रांतिकारी आन्दोलन में सम्मिलित हुए। रास सिंह बिहारी बोस का प्रताप पर बहुत विश्वास था। 23 दिसम्बर 1912 को लॉर्ड हर्डिंग्स पर बम फेंकने की योजना में वे भी सम्मिलित थे। उन्हें बनारस काण्ड के सन्दर्भ में गिरफ्तार किया गया और सन् 1916 में 5 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा हुई। बरेली के केंद्रीय कारागार में उन्हें अमानवीय यातनाएँ दी गयीं ताकि अपने सहयोगियो...

प्रताप सिंह कैरो का जीवन परिचय | Pratap Singh Kairo ka jivan prichay |

चित्र
  प्रताप सिंह कैरो का जीवन परिचय | Pratap Singh Kairo ka jivan prichay |  नाम: प्रताप सिंह कैरो जन्म: 1 अक्टूबर, 1901 मृत्यु: 6 फरवरी, 1965  स्थान: कैरों, अमृतसर, भारत मृत्यु का कारण : हत्या शिक्षा: मिशिगन विश्वविद्यालय , खालसा कॉलेज पार्टी: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पूर्व पद: पूर्वी पंजाब के मुख्यमंत्री 1956 से 1964 तक प्रताप सिंह कैरो का जीवन परिचय | प्रताप सिंह कैरों प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी, पंजाब के भूतपूर्व मुख्यमंत्री एवं प्रमुख नेता थे। प्रताप सिंह कैरों का जन्म 1 अक्टूबर 1901 को एक ढिल्लों जाट सिख परिवार में पंजाब में हुआ था। उनके पिता निहाल सिंह कैरों 1863 से 1927 ने प्रांत में महिलाओं की शिक्षा शुरू करने में अग्रणी भूमिका निभाई थी। प्रताप सिंह कैरो ने देहरादून के कर्नल ब्राउन कैम्ब्रिज स्कूल और अमृतसर के खालसा कॉलेज में शिक्षा प्राप्त की और फिर आगे की पढ़ाई के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका चले गए। अमेरिका में रहने के दौरान उन्होंने खेतों और कारखानों में काम करके अपना गुजारा किया। उन्होंने मिशिगन विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की...

प्यारेलाल नय्यर का जीवन परिचय | Pyarelal Nayyar ka jivan prichay |

चित्र
  प्यारेलाल नय्यर का जीवन परिचय | Pyarelal Nayyar ka jivan prichay |  नाम: प्यारेलाल नय्यर जन्म: 1899,  मृत्यु: 1982 स्थान: भारत बहन: सुशीला नायर प्यारेलाल नय्यर का जीवन परिचय | स्वतंत्रता सेनानी प्यारे लाल नय्यर का जन्म 1899 में दिल्ली में हुआ था। और 1982 में निधन हो गया। इनका पारिवारिक निवास पश्चिमी सीमा प्रांत (अब पाकिस्तान) में था। प्यारे लाल की शिक्षा गवर्नमेंट कॉलेज, लाहौर में हुई। उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से कला स्नातक की डिग्री प्राप्त की और 1920 के असहयोग आन्दोलन के दौरान कला स्नातकोत्तर की पढ़ाई छोड़ दी। और असहयोग आंदोलन से जुड़ गये। प्यारेलाल नय्यर महात्मा गांधी के अंतिम वर्षों में उनके निजी सचिव थे। उनकी बहन सुशीला नय्यर महात्मा गांधी की निजी चिकित्सक थीं। प्यारेलाल गांधीजी के पदचिन्हों पर चलते हुए स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय थे। उन्होंने में दांडी नमक यात्रा में भाग लिया। नय्यर ने अपने अंतिम दिनों तक गांधी पर अपना साहित्यिक कार्य जारी रखा। नय्यर के पास गांधीजी से संबंधित निजी कागजातों का एक बड़ा भंडार था। जिसे 2007 में ही सार्वजनिक किया गया था। प्यारे ल...

पोनका कनकम्मा का जीवन परिचय | Ponaka Kanakamma ka jivan prichay |

चित्र
पोनका कनकम्मा का जीवन परिचय | पोनका कनकम्मा का जीवन परिचय |  नाम: पोनका कनकम्मा जन्म: 10 जून, 1892  स्थान: मीनागल्लू, भारत मृत्यु: 15 सितम्बर, 1963 स्थान: नेल्लोर, भारत पति: पोनाका सुब्बारामी रेड्डी पिता: मारुपुरु कोंडा रेड्डी  माता: कामम्मा  स्थापना: 1923 में विजयादशमी के दिन श्री "कस्तूरीदेवी विद्यालय" (लड़कियों के लिए विद्यालय) की स्थापना। पोनका कनकम्मा का जीवन परिचय | पोनाका कनकम्मा एक भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता, कार्यकर्ता और स्वतंत्रता सेनानी थीं, जिन्हें महात्मा गांधी के शिष्य के रूप में एक वर्ष से अधिक समय तक जेल में रखा गया था। उन्होंने नेल्लोर में गर्ल्स हाई स्कूल, श्री कस्तूरीदेवी स्कूल की स्थापना की। पोनाका कनकम्मा का जन्म 10 जून 1892 को नेल्लोर जिले के मिनागल्लू में हुआ था। उनके पिता मारुपुरु कोंडा रेड्डी और मां कामाम्मा वला थीं।  वह एक अत्यंत समृद्ध जमींदारी परिवार से था। उनकी शादी उनके मामा सुब्बाराम रेड्डी से हुई। विवाह का समय उनकी आयु आठ वर्ष थी। उनके पति के रूढ़िवादी होने के कारण उन्हें स्कूल जाने की अनुमति नहीं थी। व्यावसायिक शिक्षा न होने के ब...

आंध्रप्रदेश के जनक पोट्टि श्रीरामुलु का जीवन परिचय | Potti Sriramulu ka jivan prichay |

चित्र
  आंध्रप्रदेश के जनक पोट्टि श्रीरामुलु का जीवन परिचय | Potti Sriramulu ka jivan prichay |  नाम: पोट्टि श्रीरामुलु जन्म: 16 मार्च 1901 स्थान: पदमतिपल्ली, आंध्र प्रदेश, भारत मृत्यु: 16 दिसम्बर 1952 स्थान: मद्रास, भारत माता-पिता: गुरवय्या और महालक्ष्मम्मा मौत की वजह: उपवास पेशा: अभियन्ता, सामाजिक कार्यकर्ता पदवी: आन्ध्र प्रदेश के संस्थापक प्रसिद्धि: आन्ध्र नाम अलग राज्य की मांग को लेकर भूख हड़ताल करने के लिए  पोट्टि श्रीरामुलु का जीवन परिचय |  आंध्रप्रदेश के जनक कहे जाने वाले पोट्टि श्रीरामुलु का 16 मार्च 1901 में पदमतिपल्ली, आंध्र प्रदेश हुआ था। पोट्टि श्रीरामुलु भारत के एक क्रांतिकारी थे। मद्रास राज्य से अलग आंध्र प्रदेश राज्य के निर्माण की मांग को लेकर उन्होने आमरण अनशन किया जिसके कारण अन्ततः उनकी अनशन के 58वे दिन 1952 को मृत्यु हो गयी। भारत में भाषा के आधार पर राज्यों के निर्माण के निर्णय के पीछे उनकी असामयिक मृत्यु बहुत बड़ा कारण सिद्ध हुई। वे महात्मा गांधी के परम भक्त थे। उन्होने जीवन पर्यन्त सत्य, अहिंसा, देशभक्ति और हरिजन उत्थान के लिये कार्य किया।

पूरन सिंह कोली का जीवन परिचय | Puran Singh Koli ka jivan prichay |

चित्र
पूरन सिंह कोली का जीवन परिचय | Puran Singh Koli ka jivan prichay |  नाम: पूरन सिंह कोली जन्म: नयापुरा गांव, झांसी मृत्यु: 1857 स्थान: उन्नाव, झांसी, ब्रिटिश भारत पत्नी: झलकारी बाई उपाधि: तोपची युद्ध: 1857 का प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पूरन सिंह कोली का जीवन परिचय |  पूरन सिंह कोली झांसी रियासत की सेना मे तोपची था। सन 1857 की क्रांति की महानायिका झलकारीबाई का वह पति था। पूरन सिंह कोली का जन्म झांसी के गांव नयापुरा मे एक कोली परिवार में हुआ था। 6 जून 1857को ब्रिटिश सरकार और झांसी सेने के बीच युद्ध हुआ जिसमे किले के उन्नाव दरवाजे पर कोली ने मोर्चा संभाला लेकिन कुछ समय के संधर्स के पश्चात कोली शहिद हो गए। कोली युद्ध अभ्यास के पश्चात झलकारी बाई को भी अभ्यास करवाया करते थे जिसके फलस्वरूप झलकारी बाई झांसी की महिला सैन्य टुकड़ी दुर्गा दल की सेनापति बन गई। जब युद्ध के दौरान कोली 1857 में वीरगति को प्राप्त हो गए थे तो उनके पश्चात उनकी पत्नी झलकारी बाई ने मोर्चा संभाला था।