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फ़्रेडून काबराजी का जीवन परिचय | Fredoon Jehangir Kabraji ka jivan prichay |

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फ़्रेडून काबराजी का जीवन परिचय | Fredoon Jehangir Kabraji ka jivan prichay | नाम: फ़्रेडून जहाँगीर काबराजी अन्य नाम: फ़्रेडून काबराजी जन्म: 10 फ़रवरी 1897 स्थान: भारत  मृत्यु: 1986 स्थान: इग्लैंड पत्नी: एलेनोर एम. विल्किंसन पेशा: कवि, लेखक, पत्रकार, कलाकार फ़्रेडून जहाँगीर काबराजी का जीवन परिचय | फ़्रेडून काबराजी एक प्रसिद्ध भारतीय कवि, लेखक, पत्रकार, और कलाकार थे। वे एक बेहद दिलचस्प और बहुमुखी व्यक्तित्व थे। उनका साहित्यिक योगदान और पारसी समुदाय से जुड़ा उनका सांस्कृतिक दृष्टिकोण, दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। फ़्रेडून जहाँगीर काबराजी जन्म भारत में 10 फ़रवरी 1897 को एक पारसी परिवार में हुआ था। उनके पिता जहाँगीर काबराजी एक भारतीय सिविल सेवक थे और उनकी माँ पुतलीबाई थीं। काबराजी के जीवन में एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब वह अपनी पारिवारिक अपेक्षाओं से हटकर, कला और पत्रकारिता में अपनी रुचि की ओर बढ़े। 1920 के दशक के मध्य में ब्रिटेन जाना और फिर वहाँ कला, साहित्य और पत्रकारिता में अपने प्रयासों को विस्तार देना बहुत ही प्रेरणादायक है। 1926 में उन्होंने एलेनोर एम. विल्किंसन से विवाह किया। उन्हों...

फ़ज़ले हक़ खैराबादी का जीवन परिचय | Fazle Haq Khairabadi ka jivan prichay |

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 फ़ज़ले हक़ खैराबादी का जीवन परिचय | Fazle Haq Khairabadi ka jivan prichay | नाम: अल्लामा फ़ज़ले हक़ खैराबादी जन्म: 1796 , खैराबाद, भारत मृत्यु: 19 अगस्त, 1861  स्थान: अंडमान द्वीप समूह शिक्षा: मदरसा-ए रहीमिया पेशा: मुफ्ती, विद्वान, धर्मशास्त्री और कवि फ़ज़ले हक़ खैराबादी का जीवन परिचय | अल्लामा फज़ले हक खैराबादी प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 के क्रान्तिकारी, तर्कशास्त्री व उर्दू अरबी, फारसी के प्रसिद्ध शायर और कवि थे। उनका जन्म 1797 में उत्तर प्रदेश राज्य के ज़िला सीतापुर के शहर खैराबाद में मध्यम वर्गीय मुस्लिम परिवार में हुआ था। उनके पिता फ़ज़ल-ए-इमाम खैराबादी , सदर अल-सदुर थे, जो मुगलों के धार्मिक मामलों के मुख्य सलाहकार थे। फ़ज़ले हक़ खैराबादी ने धार्मिक रीति रिवाजों से शिक्षा प्राप्त की।  फ़ज़ल-ए-हक़ 13 वर्ष की आयु में शिक्षक बन गए थे। और फिर 1816 में उन्नीस वर्ष की आयु में ब्रिटिश सरकार में नौकरी कर ली। 1828 में, उन्हें क़ज़ा विभाग में मुफ़्ती के पद पर नियुक्त किया गया। इस्लामी अध्ययन और धर्मशास्त्र के विद्वान होने के अलावा, वे एक साहित्यिक व्यक्तित्व भी थे। लेकिन ए...

काकोरी काण्ड, प्रेमकृष्ण खन्ना का जीवन परिचय | Premkrishna Khanna ka jivan prichay |

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  प्रेमकृष्ण खन्ना का जीवन परिचय | Premkrishna Khanna ka jivan prichay |  नाम: प्रेमकृष्ण खन्ना जन्म: 02 जनवरी 1894 स्थान: लाहौर, ब्रिटिश भारत मृत्यु: 0 3 अगस्त 1993  स्थान: शाहजहाँपुर, भारत प्रसिद्धि का कारण: काकोरी काण्ड पेशा: स्वतंत्रता सेनानी बाद में सांसद संगठन: हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन प्रेमकृष्ण खन्ना का जीवन परिचय | प्रेमकृष्ण खन्ना हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन के एक प्रमुख सदस्य थे और शाहजहाँपुर के रेल विभाग में ठेकेदार थे। काकोरी काण्ड में प्रयुक्त माउजर पिस्तौल के कारतूस इन्हीं के शस्त्र-लाइसेन्स पर खरीदे गये थे। और वे प्रसिद्ध क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल के करीबी सहयोगी थे। प्रेम किशन खन्ना का जन्म रायबहादुर राम किशन खन्ना के घर 2 फरवरी 1894 को लाहौर में हुआ था। जो अब आधुनिक पाकिस्तान में है। उनके दादा, डॉ. हर नारायण खन्ना, ब्रिटिश भारत के पश्चिमी पंजाब में एक सिविल सर्जन थे । खन्ना के पिता ब्रिटिश भारतीय रेलवे के मुख्य मंडल अभियंता थे, जिसका मुख्यालय शाहजहाँपुर में था। जो उस समय आगरा और अवध के संयुक्त प्रांत का एक ऐतिहासिक शहर था । खन्ना के जन्म के ...

भारत की प्रथम महिला क्रांतिकारी, प्रीतिलता वाद्देदार | Pritilata Waddedar jivan prichay |

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  भारत की प्रथम महिला क्रांतिकारी, प्रीतिलता वाद्देदार | Pritilata Waddedar jivan prichay |  नाम: प्रीतिलता वाद्देदार जन्म: 5 मई, 1911 स्थान: पाटिया उपजिला, बांग्लादेश निधन: 24 सितंबर, 1932 स्थान: चट्टोग्राम, बांग्लादेश मृत्यु का कारण: आत्महत्या पिता: जगबंधु वड्डेदार माता: प्रतिभा देवी शिक्षा: डॉ. खस्तगीर गवर्नमेंट गर्ल्स हाई स्कूल , बेथ्यून कॉलेज , ईडन मोहिला कॉलेज , कलकत्ता विश्वविद्यालय प्रीतिलता वाद्देदार का जीवन परिचय | प्रीतिलता वाडेदार एक बंगाली क्रांतिकारी राष्ट्रवादी थीं। जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । उन्हें अक्सर "बंगाल की पहली महिला शहीद" के रूप में सराहा जाता है। प्रीतिलता वादेदार का जन्म 5 मई 1911 को तत्कालीन पूर्वी भारत में स्थित चटगाँव के एक गरीब परिवार में हुआ था। उनके पिता जगबंधु वड्डेदार, नगरपालिका के क्लर्क थे। और उनकी माता प्रतिभामयी देवी गृहिणी थीं। वे चटगाँव के डॉ खस्तागिर शासकीय कन्या विद्यालय की मेघावी छात्रा थीं। उन्होने सन् 1928 में मैट्रिक की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उतीर्ण की। इसके बाद सन् 1929 में उन्होने ढाका के...

1857 के क्रांतिकारी, प्राण सुख यादव का जीवन परिचय | Pran Sukh Yadav ka jivan prichay |

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  1857 के क्रांतिकारी प्राण सुख यादव का जीवन परिचय | प्राण सुख यादव का जीवन परिचय |  नाम: प्राण सुख यादव (राव साहब)  जन्म: 1802 मृत्यु: 1888  स्थान: हरियाणा प्रसिद्ध लड़ाइयाँ: पखली की लड़ाई, प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध, द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध, मीरपुर की लड़ाई, राजौरी की लड़ाई, बारामूला की लड़ाई, धमतौर का युद्ध, गांधीगढ़ का युद्ध, जमरूद की लड़ाई, नसीबपुर की लड़ाई, मनकेरा की लड़ाई, है प्राण सुख यादव का जीवन परिचय | भारतीय सेना-नायक और 1857 की क्रांति में साथी क्रांतिकारी और सिख कमांडर हरी सिंह नलवा के मित्र थे। अपने पूर्व समय में उन्होंने खालसा सेना और फ्रांसीसी हथियारों की तरफ से लड़ाई सीखी थी। महाराजा महाराजा सिंह के निधन के बाद प्रथम और द्वितीय ब्रिटिश-सिख संघर्ष में भागीदारी की भूमिका निभाई। प्राण सुख यादव जी का जन्म 1802 में हरियाणा में हुआ था। उनके जन्म के समय उनके पिता बंगाल युद्ध में लड़ रहे थे। 5 साल की उम्र में ही अपने पिता की देख-रेख में उन्होंने युद्ध कला सीखने के साथ-साथ कुशल युद्ध रणनीतियां भी सीखीं। यह उनके पिता की शिक्षा और ज्ञान की खोह थी कि वे सत्रह साल की...

बंगाली क्रांतिकारी, प्रमोद रंजन चौधरी का जीवन परिचय | Pramod Ranjan Chowdhary ka jivan prichay |

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बंगाली क्रांतिकारी, प्रमोद रंजन चौधरी का जीवन परिचय | Pramod Ranjan Chowdhary ka jivan prichay |  नाम: प्रमोद रंजन चौधरी  जन्म: 1904, स्थान: चिट्टागॉन्ग, केलिशहर  मृत्यु: 28 सितम्बर 1927 पिता: श्री ईशान चन्द्र चौधरी  प्रसिद्धि: क्रांतिकारी प्रमोद रंजन चौधरी का जीवन परिचय |  प्रमोद रंजन चौधरी एक बंगाली क्रांतिकारी थे। उन्होंने अंग्रेज़ शासन के विरुद्ध आवाज़ उठाई थी प्रमोद का जन्म चिट्टागॉन्ग के केलिशहर में हुआ जो अब बंग्लादेश में है। उनके पिता का नाम श्री ईशान चन्द्र चौधरी था। 1920 में शिक्षा के दौरान वह अनुशीलन समिति से जुड़ गए जो कि एक क्रांतिकारी संगठन के रूप में प्रसिद्ध है। 1921 में वह असहयोग आन्दोलन से भी जुड़ गए। 1925 में चौधरी को दक्षिणेश्वर बम कांड में संदिग्ध के रूप में पकड़ा गया था और कड़ी सज़ा सुनाई गई। अलीपुर जेल में जहाँ वह बन्द थे, चौधरी ने 28 मई 1927 को भूपेन्द्र नाथ चटर्जी को मार डाला जो पुलिस के डिप्टी कमिशनर थे। इसी के कारण उसे 28 सितम्बर 1927 को फाँसी दे दी गई।

भारतीय क्रांतिकारी, प्रफुल्ल चाकी का जीवन परिचय | Prafulla Chaki ka jivan prichay |

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  भारतीय क्रांतिकारी, शहीद चौकीदार का जीवन परिचय | प्रफुल्ल चाकी का जीवन परिचय |  नाम: प्रफुल्ल चाकी पूरा नाम: प्रफुल्ल चंद्र चाकी जन्म: 10 दिसंबर 1888  स्थान: बोगुरा, बांग्लादेश मृत्यु: 2 मई, 1908  स्थान: मोकामाघाट, भारत मृत्यु का कारण: आत्महत्या पिता : नारायण राज चैकी  माता: स्वर्णमयी देवी  शिक्षा: रंगपुर जिला विद्यालय पूरा नाम: प्रफुल्ल चंद्र चाकी व्यवसाय: भारत के स्वतंत्रता सेनानी संगठन: जुगंतर प्रफुल्ल चाकी का जीवन परिचय | प्रफुल्ल चाकी भारत के स्वतन्त्रता सेनानी एवं महान क्रान्तिकारी थे। भारतीय स्वतन्त्रता के क्रान्तिकारी संघर्ष में उनका नाम अत्यन्त सम्मान के साथ लिया जाता है इनका जन्म 10 दिसम्बर 1888 को उत्तरी बंगाल के बोगरा जिले (अब बांग्लादेश में स्थित) के बिहारी गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम राज नारायण चकी और माता का नाम स्वर्णमयी देवी था। जब वे दो वर्ष के थे तभी उनके पिता जी का निधन हो गया। उनकी माता ने अत्यंत अनाथ से अनाथालय का पालन-पोषण किया। छात्रों के जीवन में ही युवाओं का परिचय स्वामी महेश्वरानंद द्वारा स्थापित गुप्त क्रांतिकारी संगठन से...

स्वतंत्रता सेनानी, प्रतिपाल सिंह का जीवन परिचय | Pratipal Singh ka jivan prichay |

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स्वतंत्रता सेनानी, प्रतिपाल सिंह का जीवन परिचय |   नाम: प्रतिपाल सिंह  जन्म: मौदहा, फर्रुखाबाद मृत्यु: 28 अक्टूबर 1986  प्रतिपाल सिंह का जीवन परिचय | प्रतिपाल सिंह भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। वह हमेशा कांग्रेस के बड़े नेताओं के संपर्क में रहते थे। पंडित गोविंद वर्ष पंत और मोहम्मद फारूक चिश्ती के वह बेहद करीबी थे और पंडित जवाहरलाल नेहरू के साथ सराय जेल में बंद थे। ठाकुर प्रतिपाल सिंह रायटर का जादूगर गांव फर्रूखाबाद जिले में मौदहा था। लेकिन पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने अपने ननिहाल कुरियाकलां को अपनी कर्मभूमि बना लिया। सबसे पहले वह 1947 में जिला परिषद के सदस्य चुने गये। 1952 के प्रथम विधान सभा चुनाव में वह जमौर विधान सभा क्षेत्र से निर्वाचित हुए। 1957 में उन्होंने कांग्रेस पार्टी से एमपी के टिकट मांगे लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्ता ने उनके टिकट कटवा दिए और उन्होंने कांग्रेस पार्टी को खत्म कर दिया। वह पार्टी से बगावत करके पेज सोसलिस्ट पार्टी से चुनावी मैदान में हैं। 1952 से 1957 तक वे जिला परिषद के अध्यक्ष भी रहे। ठाकुर प्रतिपाल सिंह जिले के ऐसे स्व...

प्रतापसिंह बारहठ का जीवन परिचय | Pratap Singh Barhat ka jivan prichay |

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प्रतापसिंह बारहठ का जीवन परिचय | Pratap Singh Barhat ka jivan prichay |  नाम: प्रतापसिंह बारहठ जन्म: 24 मई, 1893 मृत्यु: 24 मई, 1918  स्थान: उदयपुर, भारत माता: माणिक्य कंवर पीता: केसरी सिंह बारहठ  प्रतापसिंह बारहठ का जीवन परिचय |प्रतापसिंह बारहठ भारत के स्वतंत्रता संग्राम के एक महान क्रांतिवीर तथा केसरी सिंह बारहठ के पुत्र थे। इनकी माता का नाम माणिक्य कंवर था प्रतापसिंह बारहठ जन्म राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा के पास देवखेड़ा गांव में 24 मई 1893 में हुआ था। इनका प्रारंभिक शिक्षा कोटा, अजमेर और जयपुर में हुई। क्रांतिकारी मास्टर अमीरचंद से प्रेरणा लेकर देश को स्वतंत्र करवाने में जुट गए। वे रासबिहारी बोस का अनुसरण करते हुए क्रांतिकारी आन्दोलन में सम्मिलित हुए। रास सिंह बिहारी बोस का प्रताप पर बहुत विश्वास था। 23 दिसम्बर 1912 को लॉर्ड हर्डिंग्स पर बम फेंकने की योजना में वे भी सम्मिलित थे। उन्हें बनारस काण्ड के सन्दर्भ में गिरफ्तार किया गया और सन् 1916 में 5 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा हुई। बरेली के केंद्रीय कारागार में उन्हें अमानवीय यातनाएँ दी गयीं ताकि अपने सहयोगियो...

प्रताप सिंह कैरो का जीवन परिचय | Pratap Singh Kairo ka jivan prichay |

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  प्रताप सिंह कैरो का जीवन परिचय | Pratap Singh Kairo ka jivan prichay |  नाम: प्रताप सिंह कैरो जन्म: 1 अक्टूबर, 1901 मृत्यु: 6 फरवरी, 1965  स्थान: कैरों, अमृतसर, भारत मृत्यु का कारण : हत्या शिक्षा: मिशिगन विश्वविद्यालय , खालसा कॉलेज पार्टी: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पूर्व पद: पूर्वी पंजाब के मुख्यमंत्री 1956 से 1964 तक प्रताप सिंह कैरो का जीवन परिचय | प्रताप सिंह कैरों प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी, पंजाब के भूतपूर्व मुख्यमंत्री एवं प्रमुख नेता थे। प्रताप सिंह कैरों का जन्म 1 अक्टूबर 1901 को एक ढिल्लों जाट सिख परिवार में पंजाब में हुआ था। उनके पिता निहाल सिंह कैरों 1863 से 1927 ने प्रांत में महिलाओं की शिक्षा शुरू करने में अग्रणी भूमिका निभाई थी। प्रताप सिंह कैरो ने देहरादून के कर्नल ब्राउन कैम्ब्रिज स्कूल और अमृतसर के खालसा कॉलेज में शिक्षा प्राप्त की और फिर आगे की पढ़ाई के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका चले गए। अमेरिका में रहने के दौरान उन्होंने खेतों और कारखानों में काम करके अपना गुजारा किया। उन्होंने मिशिगन विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की...