बजरंग बहादुर सिंह का जीवन परिचय | Bajrang Bahadur Singh ka jivan prichay
बजरंग बहादुर सिंह का जीवन परिचय | Bajrang Bahadur Singh ka jivan prichay
नाम: बजरंग बहादुर सिंह
जन्म: 1905
मौत: 1970
पत्नी: रानी रुक्मिणी देवी
निकनेम: राय साहेब, भदरी नरेश
राष्ट्रीयता: भारतीय
प्रसिद्धि: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम
पार्टी: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
बजरंग बहादुर सिंह का जीवन परिचय |
राजा बजरंग बहादुर सिंह राजनीतिज्ञ एवं स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी थे। वे हिमाचल प्रदेश के उपराज्यपाल व अवध की तालुकदारी रियासत भदरी के राजा थे। वे महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में सक्रिय रहे।
राजा बजरंग बहादुर सिंह का जन्म सन 1905 में उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ मे भदरी नरेश राजा किशन प्रसाद सिंह के घर हुआ, आपके दो भाई भद्रेश्वर प्रताप सिंह और त्रिलोचन प्रताप सिंह थे लेकिन भदरी नरेश के ज्येष्ठ पुत्र होने के कारण पिता की रियासत के राजा बजरंग बहादुर सिंह बने। इनको राजा साहब भदरी और राजा राय साहब जैसे उपनामो भी जाने जाते थे। 1926 में राजा बजरंग बहादुर सिंह का विवाह अजयगढ़ के महाराजा पुण्य प्रताप सिंह और महारानी रुक्मणी देवी की पुत्री रानी गिरिजा देवी से हुआ।
राजा बजरंग बहादुर सिंह कई आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई। स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में इनकी रियासत भदरी का कई स्थानों पर ज़िक्र है। महात्मा गाँधी के असहयोग आंदोलन का राजा भदरी ने समर्थन किया और असहयोग आंदोलन में अपनी सक्रिय भूमिका दर्ज कराते हुए बजरंग बहादुर सिंह ने विदेशी वस्त्रो का बहिष्कार कर कपड़ों की होली जलायी। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद वर्ष 1955 में राजा बजरंग बहादुर हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल बने। 1 जनवरी 1955 को उप राज्यपाल पद पर नियुक्ति हुई और 13 अगस्त 1963 तक इस पद पर कार्यरत रहे।
देश के पहले कृषि विश्वविद्यालय अर्थात गोविंद बल्लभ पंत यूनिवर्सिटी ऑफ़ एग्रिकल्चर एंड टेक्नॉलोजी के संस्थापक सदस्य व उपकुलपति थे। आपने "हाउ टू ट्रेन योर डॉग" नामक पुस्तक भी लिखी। राय साहब बजरंग ने हिंद फ्लाइंग क्लब की स्थापना की थी।
1970 में एक बीमार रहने के कारण देश के एक कुशल प्रशासक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, समाजसेवी राजा बजरंग बहादुर सिंह का निधन हो गया।
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