गया प्रसाद शुक्ल का जीवन परिचय

 


गया प्रसाद शुक्ल का जीवन परिचय

गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' जी का जन्म श्रावण शुक्ल  त्रयोदशी, संवत 1940 विक्रमीय 21अगस्त सन 1883 ईस्वी में उत्तर प्रदेश उन्नाव ज़िले के हडहा नामक ग्राम में हुआ इनकी मृत्यु 20 मई, सन 1972 ईस्वी मैं हुई थी सनेही जी ब्रजभाषा के प्रसिद्ध कवि थे।

इनके पिता का नाम पंडित अक्सेरीलाल शुक्ल बड़े साहसी और देशभक्त व्यक्ति थे और माता का नाम श्रीमती रुक्मिणी देवी था। 

गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' हिन्दी साहित्य के आधुनिक काल के द्विवेदी युगीन साहित्यकार हैं। इन्होंने 'सनेही' उपनाम से कोमल भावनाओं की कविताएँ, 'त्रिशूल' उपनाम से राष्ट्रीय कविताएँ तथा 'तरंगी' एवं 'अलमस्त' उपनाम से हास्य-व्यंग्य की कविताएँ लिखीं। इनकी देशभक्ति तथा जन-जागरण से सम्बद्ध कविताएँ अत्यधिक प्रसिद्ध रही हैं।

 इनकी रचनाएं: 1करुणा कादंबिनी, 2 प्रेम पचीसी, 3 गप्पाष्टक, 4 कुसुमांजलि, 5 त्रिशूल तरंग,6 राष्ट्रीय मंत्र, 7 संजीवनी, 8 राष्ट्रीय वीणा, आदि है।

इसके अतिरिक्त दो और काव्य-पुस्तिका 'मानस तरंग' एवं 'करुण भारती' का नामोल्लेख भी मिलता है।


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