उषा मेहता का जीवन परिचय | Usha Mehta ka jeevan parichay | उषा मेहता की लघु जीवनी हिंदी में |

 


उषा मेहता का जीवन परिचय | Usha Mehta ka jeevan parichay | उषा मेहता की लघु जीवनी हिंदी में | 

नाम: उषा मेहता

जन्म: 25 मार्च 1920 ई.

स्थान: सूरत, भारत

निधन: 11 अगस्त, 2000 ई.

स्थान: मुंबई, भारत

पिता: हरिप्रसाद मेहता

माता: घेलिबेन मेहता

वैवाहिक स्थिति: अविवाहित

शिक्षा: मुम्बई विश्वविद्यालय (स्नातक, पीएचडी)

पेशा: कार्यकर्ता, प्रोफ़ेसर, स्वतंत्रता सेनानी

पुरस्कार: पद्म विभूषण

👉प्रसिद्धि का कारण: 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में कांग्रेस गुप्त रेडियो को शुरूआत। 

उषा मेहता का जीवन परिचय।

भारत की स्वतंत्रता सेनानी उषा मेहता का जन्म गुजराती परिवार में 25 मार्च 1920 में सूरत के पास एक गाँव सारस में हुआ था। वे अपने माता पिता की लाड़ली बेटी थी। उषा मेहता के पिता का नाम हरिप्रसाद मेहता था। वह एक न्यायाधीश थे। उषा मेहता की माता का नाम घेनिबेन मेहता था। जो कि ग्रहणी थी। उषा मेहता के परिवार में उनका एक भाई भी था।

उषा की प्रारंभिक स्कूली शिक्षा खेड़ा और भरूच में और फिर चंदारामजी हाई स्कूल, बॉम्बे में हुई। वह एक औसत छात्रा थी। 1935 में, उनकी मैट्रिक परीक्षा ने उन्हें अपनी कक्षा के शीर्ष 25 छात्रों में शामिल कर दिया। उन्होंने विल्सन कॉलेज , बॉम्बे में अपनी शिक्षा जारी रखी और 1939 में दर्शनशास्त्र में प्रथम श्रेणी की डिग्री के साथ स्नातक की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने कानून की पढ़ाई भी शुरू की। लेकिन भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल होने के लिए 1942 में अपनी पढ़ाई समाप्त कर दी। इसके बाद 22 साल की उम्र से उन्होंने पूरे समय स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया।

उषा मेहता एक गांधीवादी और भारत की स्वतंत्रता सेनानी थीं। उन्हें कांग्रेस रेडियो के आयोजन के लिए भी याद किया जाता है। उषा ने भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान अपने सहयोगियों के साथ 14 अगस्त 1942 को खुफिया कांग्रेस रेडियो प्रारंभ किया थी। इस रेडियो से पहला प्रसारण भी उषा की आवाज में हुआ था। यह रेडियो लगभग हर दिन अपनी जगह बदलता था, ताकि अंग्रेज अधिकारी उसे पकड़ न सकें। इस खुफिया रेडियो को डॉ॰ राममनोहर लोहिया, अच्युत पटवर्धन सहित कई प्रमुख नेताओं ने सहयोग दिया। रेडियो पर महात्मा गांधी सहित देश के प्रमुख नेताओं के रिकार्ड किए गए संदेश बजाए जाते थे। तीन माह तक प्रसारण के बाद अंतत: अंग्रेज सरकार ने उषा और उनके सहयोगियों को पकड़ा लिया। और उन्हें जेल की सजा दी गई। जेल में उनका स्वास्थ्य बहुत खराब हो गया और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। बाद में 1946 में रिहा किया गया।

स्वतंत्रता के बाद उन्होंने गांधी के सामाजिक एवं राजनीतिक विचारों पर पीएचडी की और बंबई विश्वविद्यालय में अध्यापन आरंभ किया। स्वतंत्रता के बाद उषा मेहता गांधीवादी विचारों को आगे बढ़ाने विशेषकर महिलाओं से जुडे़ कार्यक्रमों में काफी सक्रिय रही। उन्हें गांधी स्मारक निधि की अध्यक्ष चुना गया और वह गांधी शांति प्रतिष्ठान की सदस्य भी थीं।

1998 में, भारत सरकार ने उन्हें दूसरे पद्म विभूषण से सम्मानित किया। उषा मेहता का निधन 11 अगस्त 2000 को हुआ। उषा मेहता एक समाज सेविका थी। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज सेवा में लगा दिया था। वे जीवन भर अविवाहित रही। उन्होंने कभी शादी नही की।

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