केयूर भूषण का जीवन परिचय | Keyur Bhushan ka jeevan parichay | केयूर भूषण की लघु जीवनी हिंदी में |


केयूर भूषण का जीवन परिचय | Keyur Bhushan ka jeevan parichay | केयूर भूषण की लघु जीवनी हिंदी में | 

नाम: केयूर भूषण 

जन्म: 1928 ई.

मृत्यु: 3 मई 2018 ई. 

स्थान: जाटा, छत्तीसगढ़, भारत

पिता: श्री मथुरा प्रसाद मिश्रा

माता: श्रीमती रोहानी देवी

पत्नी: सूर्या कुमारी

पार्टी: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

पेशा: स्वतंत्रता सेनानी, साहित्यकार, पत्रकार, राजनेता,

पुरस्कार: पंडित रविशंकर शुक्ल सद्भावना 

रचनाएँ: उपन्यास:- कुल के मरजाद, फुटहा करम, लोक लाज, नाटक:- सोना कैना, कहानी:- मोंगरा, कालू भगत, डोंगराही रद्दा, गीत:- बनिहार, निबंध संग्रह:- हीरा के पीरा, मोर मयारुक, आदि

👉लोकसभा, संसद सदस्य 1980 से 1989 तक।

👉11 वर्ष से ही आजादी की लड़ाई में भाग लेना प्रारंभ कर दिया था।

👉1942 के आंदोलन में भाग लिए।

👉18 वर्ष में, 9 माह के लिए जेल गए।

👉रायपुर लोकसभा से दो बार सांसद रहे।


केयूर भूषण का जीवन परिचय। 

केयूर भूषण भारत के स्वतन्त्रता सेनानी एवं छत्तीसगढ़ी साहित्यकार थे। 

भूषण का जन्म 1928 को छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के जांता गांव में हुआ था। इनके पिता का नाम श्री मथुरा प्रसाद मिश्रा और माता का नाम श्रीमती रोहानी देवी था।

केयूर भूषण की पढ़ाई बेमेतरा के जांता गांव में पांचवी तक की। पढ़ाई के दौरान स्कूल में ही आजादी के संग्राम की चर्चा सुनते थे। राजनीति और समाजसेवा में छात्र अवस्था से ही कार्यरत हो जाने के कारण वे मिडिल स्कूल से आगे शिक्षा ग्रहण नहीं कर सके। उन्होंने कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी तथा सर्वोदय में कार्य किया। उन्होंने महात्मा गांधी के आह्वान पर अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध 1942 के  असहयोग आन्दोलन में भाग लिया और गिरफ्तार हुए। उस समय वह रायपुर केन्द्रीय जेल में सबसे कम उम्र के राजनीतिक बंदी थे। 

केयूर भूषण एक भारतीय राजनीतिज्ञ थे। वह 1980 और 1984 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य के रूप में मध्य प्रदेश के  रायपुर से भारत की संसद के निचले सदन लोकसभा के लिए चुने गए।

छत्तीसगढ़ सरकार ने वर्ष 2001 में राज्योत्सव के अवसर पर उन्हें पंडित रविशंकर शुक्ल सद्भावना पुरस्कार से सम्मानित किया था। भारत के स्वतन्त्रता सेनानी, गांधीवादी चिंतक एवं छत्तीसगढ़ी साहित्यकार केयूर भूषण 3 मई 2018 में रायपुर में निधन हो गया।

केयूर भूषण का पत्रकारिता में भी काफी योगदान रहा। उन्होंने साप्ताहिक छत्तीसगढ़, साप्ताहिक छत्तीसगढ़ संदेश, और मासिक अन्त्योदय (इंदौर) का संपादन भी किया। केयूर भूषण की रचनाओं में सोना कैना, मोंगरा, बनिहार, कुल के मरजाद, फुटहा करम, आंसू म फिले अंचरा, समे के बलिहारी, कालू भगत, लोक लाज, फूटहा करम, रानी ब्राह्मण की दुर्दशा, आदि है।


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