क्षीरोदा सुन्दरी चौधरी का जीवन परिचय | Kshiroda Sundari Chowdhary ka jeevan parichay | क्षीरोदा सुन्दरी चौधरी की लघु जीवनी हिंदी में |

 

क्षीरोदा सुन्दरी चौधरी का जीवन परिचय | Kshiroda Sundari Chowdhary ka jeevan parichay | क्षीरोदा सुन्दरी चौधरी की लघु जीवनी हिंदी में | 

नाम: क्षीरोदा सुन्दरी चौधरी 

जन्म: 1883 ई.

स्थान: सुंदाइल, मैमनसिंह, ब्रिटिश भारत

पिता: शिवसुन्दर राय

माता: दुर्गा सुन्दरी देवी 

क्षीरोदा सुन्दरी चौधरी का जीवन परिचय |

सुप्रसिद्ध भारतीय महिला क्रान्तिकारी क्षीरोदा सुन्दरी चौधरी का जन्म मैमनसिंह जिला के सुंदाइल गांव में 1883 में हुआ था। पिता शिवसुन्दर राय और माता दुर्गा सुन्दरी देवी की इस लड़की का विवाह खारूआ ग्राम के बृज किशोर चौधरी से हुआ था। लेकिन 32 साल की उम्र में वह विधवा हो गई थीं। विप्लवी क्षितीश चौधरी उनके देवर का लड़का था। मैमतसिंह के प्रसिद्ध विप्लवी नेता सुरेन्द्र मोहन घोष के साथ युगान्तर दल’ में काम करते हुए क्षितीश चौधरी को अपनी इस चाची से बहुत सहायता मिली।

30 जून, 1961 को डिप्टी सुपरिटेंडेंट पुलिस बसन्त चटर्जी की हत्या के बाद सुरेन्द्र मोहन घोष और क्षितीश चौधरी के वारंट निकले तो वे दोनों भूमिगत हो गए। भागकर मैमनसिंह चले गए और वहां पुलिस क्लब की बगल में ही मकान लेकर रहने लगे कि पुलिस को शक न हो। हुआ भी वही। पुलिस उन्हें इधर-उधर ढूंढ़ती रही और ये दोनों क्षीरोदा सुन्दरी को साथ लेकर पुलिस की नाक के नीचे रहते रहे। कुछ दिन बाद ‘भारत-जर्मन षड्यंत्र’ के सर्व प्रमुख नेता यदु गोपाल मुखर्जी और प्रसिद्ध विप्लवी नलिनीकान्त भी आकर वहीं रहने लगे। क्षीरोदा सुन्दरी इनके साथ छद्म मां बन कर रहती थीं।

जीवन में क्षीरोदा सुन्दरी को भी उनके साथ भूमिगत हो जाना पड़ा। इसी सिलसिले में उन्हें अनेक कष्ट झेलते हुए यहां-वहां भटकना भी पड़ा। पुलिस पीछे लगी रहती थी और ये लोग एक से दूसरी जगह बदलते हुए छिपते रहते थे। सुरेन्द्र मोहन घोष के पिता कामिनी मोहन घोष विप्लवी दल के प्रतिष्ठित नेता थे। और क्षितीश चौधरी की यह चाची दल की प्रतिष्ठित मां। इनकी छाया में रहते हुए अनेक ने पुलिस को खूब चकमे दिए और पकड़ में नहीं आए।

जैसे ही इन लोगों को खबर मिली कि मैमनसिंह पुलिस क्लब के पास वाला घर पुलिस की निगाह में आ गया है, क्षीरोदा सुन्दरी को साथ लेकर सभी लोग नारायण गंज के देवभोग स्थान में चले गए। केवल नेता सुरेन्द्र मोहन घोष इनके साथ न जाकर कहीं अन्यत्र निकल गए। अब तो पुलिस इनकी खोज में सारे बंगाल का चप्पा-चप्पा छान रही थी। जैसे ही भनक पड़ती, ये लोग पुलिस-घेरा तोड़ कर भी भेष बदल कर निकल जाते। इसी तरह देवभोग से सरिषाबाड़ी, फिर वहां से जमालपुर, सीराजगंज। हर जगह क्षीरोदा सुन्दरी मां बन कर उन्हें आश्रय देती रहीं। यद गोपाल मुखर्जी, नलिनीकान्त, सतीश ठाकुर, नगेन्द्र शेखर चक्रवर्ती, उषा राय, पृथीष बसु, क्षितीश चौधरी आदि अनेक क्रान्तिकारी इस मां की शरण में रहने के लिए आते-जाते रहे। आगे चलकर तो ऐसा समय आया कि महीने-डेढ़ महीने बाद ही इन्हें जगह बदलनी पड़ जाती। अंत में घुबड़ी गांव चुनना पड़ा। पहले दो लोग वहीं माछ-भीत का होटल खोलने भेजे गए। फिर सभी लोग जाकर इस गांव में बस गए।

जैसे ही पुलिस को खबर मिली कि क्षीरोदा सुन्दरी खारूआ गांव लौट आई हैं, पुलिस ने अचानक उस मकान पर घेरा डाल दिया। पूछताछ शुरू हुई। क्षीरोदा सुन्दरी ने कहा, “मैं तो काशी में थी। आप फलां फलां धर्मशाला से पूछ लीजिये। ” क्षीरोदा सुन्दरी, ते तीन चार धर्मशालाओं के नाम-पते पुलिस को बता दिए। केवल वह पता नहीं बताया। जहां उन्होंने क्रान्तिकारियों के लिए गुप्त संदेश छोड़ा था। इसलिए पुलिस पूछताछ करके निराश वापस लौट आई। क्षीरोदा सुन्दरी को गिरफ्तार करके भी, कोई प्रमाण न मिलने के कारण, शीघ्र रिहा कर देना पड़ा।

क्षीरोदा सुन्दरी की 1916 से 1917 की यह कहानी तब प्रकाश में आई, जब 1959 में 76 साल की उम्र में उन्होंने खुद इसे लिखा।



टिप्पणियाँ

Read more

गोपालस्वामी दोराईस्वामी नायडू का जीवन परिचय | G.D. Naidu ka jeevan parichay | जी.डी. नायडू की जीवनी हिन्दी में|

शंकरलाल द्विवेदी का जीवन परिचय | Shankarlal Dwivedi ka jeevan parichay | शंकरलाल द्विवेदी की लघु जीवनी हिंदी में |

गया प्रसाद शुक्ल का जीवन परिचय

भवानी प्रसाद मिश्र का जीवन परिचय | Bhavani Prasad Mishra ka jeevan parichay | भवानी प्रसाद मिश्र की लघु जीवनी हिंदी में |