भारतरत्न राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन का जीवन परिचय | Purushottam Das Tandon ka jivan prichay |
भारतरत्न राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन का जीवन परिचय | Purushottam Das Tandon ka jivan prichay |
नाम: पुरुषोत्तम दास टंडन
जन्म: 01 अगस्त 1882
मृत्यु: 01 जुलाई 1962
स्थान: प्रयागराज, उत्तर प्रदेश
शिक्षा: एल.एल.बी. और एम.ए.
अभिभावक: सालिग राम टंडन
शिक्षा: मुइर सेंट्रल कॉलेज, मुइर सेंट्रल कॉलेज
प्रसिद्धि: स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता
पार्टी: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
पुरस्कार: भारतरत्न (1961)
आंदोलन: 'सविनय अवज्ञा आन्दोलन', 'बिहार किसान आन्दोलन'
कार्य काल: विधानसभा प्रवक्ता उत्तर प्रदेश- 31 जुलाई, 1937 से 10 अगस्त, 1950 तक
पुरुषोत्तम दास टंडन का जीवन परिचय |
भारतरत्न राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन भारत के स्वतन्त्रता सेनानी एवं राजनेता थे। वे भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के अग्रणी पंक्ति के नेता तो थे ही, समर्पित राजनयिक, हिन्दी के अनन्य सेवक, कर्मठ पत्रकार, तेजस्वी वक्ता और समाज सुधारक भी थे।
पुरुषोत्तम दास टंडन का जन्म 1 अगस्त 1882 को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज नगर में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय सिटी एंग्लो वर्नाक्यूलर विद्यालय में हुई। 1894 में उन्होंने इसी विद्यालय से मिडिल की परीक्षा उत्तीर्ण की।
1897 में हाई स्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उनका विवाह मुरादाबाद निवासी नरोत्तमदास खन्ना की पुत्री चन्द्रमुखी देवी के साथ हो गया। 1899 कांग्रेस के स्वयंसेवक बने, 1899 इण्टरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की और इसी बीच वे स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के म्योर सेण्ट्रल कॉलेज में प्रवेश लिया किंतु अपने क्रांतिकारी कार्यकलापों के कारण उन्हें 1901 में वहाँ से निष्कासित कर दिया गया। 1903 में उनके पिता का निधन हो गया। इन सब कठिनाइयों को पार करते हुए उन्होंने 1904 में बी ए कर लिया।
1905 से उनके राजनीतिक जीवन का प्रारम्भ हुआ। 1905 में उन्होंने बंगभंग आन्दोलन से प्रभावित होकर स्वदेशी का व्रत धारण किया। 1906 में उन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का प्रतिनिधि चुना गया।यही समय था जब उनकी प्रसिद्ध रचना "बन्दर सभा महाकाव्य" 'हिन्दी प्रदीप' में प्रकाशित हुई। 1906 में एल.एल.बी की उपाधि प्राप्त करने के बाद वकालत प्रारम्भ की। पढ़ाई जारी रखते हुए उन्होंने 1907 में इतिहास में स्नात्कोत्तर उपाधि प्राप्त की और इलाहाबाद उच्च न्यायालय में उस समय के नामी वकील तेज बहादुर सप्रू के जूनियर बन गए।
उन्होंने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में इलाहाबाद का प्रतिनिधित्व किया। वे कांग्रेस पार्टी की उस समिति से जुड़े थे जिसने 1919 में जलियांवाला बाग कांड का अध्ययन किया था । उन्होंने सार्वजनिक कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए 1921 में वकालत छोड़ दी।
1920 और 1930 के दशक में, उन्हें क्रमशः असहयोग आंदोलन और नमक सत्याग्रह में भाग लेने के लिए गिरफ्तार किया गया था।उन्होंने 1934 में बिहार प्रांतीय किसान सभा के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया । उन्होंने 31 जुलाई 1937 से 10 अगस्त 1950 तक 13 वर्षों की अवधि के लिए वर्तमान उत्तर प्रदेश की विधान सभा के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। वे 1946 में भारत की संविधान सभा के लिए चुने गए थे। उन्होंने 1947 में हिंदू रक्षक दल की स्थापना की। वे 1952 में लोकसभा और 1956 में राज्यसभा के लिए चुने गए। इसके बाद खराब स्वास्थ्य के कारण वे सक्रिय सार्वजनिक जीवन से सेवानिवृत्त हो गए।
उन्होंने जवाहरलाल नेहरू की जीवनी लिखी, जिसका शीर्षक था 'द अनफॉरगेटेबल नेहरू', जिसे नेशनल बुक ट्रस्ट इंडिया द्वारा प्रकाशित किया गया था वर्ष 1961 में हिन्दी भाषा को देश में अग्रणी स्थान दिलाने में अहम भूमिका निभाने के लिए उन्हें देश का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार दिया गया। 23 अप्रैल, 1961 को उन्हें भारत सरकार द्वारा 'भारत रत्न' की उपाधि से विभूषित किया गया। राष्ट्रभाषा हिन्दी के लिए समर्पित पुरुषोत्तम दास टंडन जी का निधन 1 जुलाई, 1962 को हुआ।
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