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भारतरत्न राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन का जीवन परिचय | Purushottam Das Tandon ka jivan prichay |

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भारतरत्न राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन का जीवन परिचय | Purushottam Das Tandon ka jivan prichay |  नाम: पुरुषोत्तम दास टंडन जन्म: 01 अगस्त 1882 मृत्यु: 01 जुलाई 1962 स्थान: प्रयागराज, उत्तर प्रदेश शिक्षा: एल.एल.बी. और एम.ए. अभिभावक: सालिग राम टंडन शिक्षा: मुइर सेंट्रल कॉलेज, मुइर सेंट्रल कॉलेज प्रसिद्धि: स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता पार्टी: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पुरस्कार: भारतरत्न (1961) आंदोलन: 'सविनय अवज्ञा आन्दोलन', 'बिहार किसान आन्दोलन' कार्य काल: विधानसभा प्रवक्ता उत्तर प्रदेश- 31 जुलाई, 1937 से 10 अगस्त, 1950 तक पुरुषोत्तम दास टंडन का जीवन परिचय |  भारतरत्न राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन भारत के स्वतन्त्रता सेनानी एवं राजनेता थे। वे भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के अग्रणी पंक्ति के नेता तो थे ही, समर्पित राजनयिक, हिन्दी के अनन्य सेवक, कर्मठ पत्रकार, तेजस्वी वक्ता और समाज सुधारक भी थे। पुरुषोत्तम दास टंडन का जन्म 1 अगस्त 1882 को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज नगर में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय सिटी एंग्लो वर्नाक्यूलर विद्यालय में हुई। 1894 में उन्होंने इसी विद्याल...

भारतीय क्रांतिकारी पांडुरंग महादेव बापट का जीवन परिचय | Pandurang Mahadev Bapat ka jivan prichay |

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भारतीय क्रांतिकारी पांडुरंग महादेव बापट का जीवन परिचय | पांडुरंग महादेव बापट का जीवन परिचय |  नाम: पांडुरंग महादेव बापट अन्य नाम: सेनापति बापट जन्म: 12 मार्च 1880  स्थान: पारनेर, महाराष्ट्र मृत्यु: 28 अप्रैल 1967 स्थान: महाराष्ट्र, भारत  शिक्षा: सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय, डेक्कन कॉलेज पोस्ट ग्रेजुएट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट व्यवसाय: स्वतंत्रता सेनानी, द्वितीय, सामाजिक कार्यकर्ता आंदोलन: भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन, संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन पांडुरंग महादेव बपत का जीवन परिचय। पांडुरंग महादेव बापट भारत स्वतंत्रता संग्राम के महान योद्धा थे वे सेनापति बापट के नाम से भी अधिक प्रसिद्ध हैं। पांडुरंग महादेव बापट का जन्म 12 नवंबर 1880 को परनेर में एक मराठी चितपावन ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनका परिवार मूल रूप से रत्नागिरी का था। बापट ने पारनेर में प्राथमिक शिक्षा के बाद बारह साल की अवस्था में न्यू इंग्लिश इवोक- पुणे में शिक्षा ग्रहण की। अपनी उच्च शिक्षा को जारी रखने के उद्देश्य से स्नातक की परीक्षा अध्ययन करने के उद्देश्य से बापट ने बंबई पहुंचकर स्कूल में लघु अध्ययन का कार्...

परमेश्वरीलाल गुप्त का जीवन परिचय | Parmeshwarilal Gupta ka jivan prichay |

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भगवानीलाल गुप्ता का जीवन परिचय | परमेश्वरलाल गुप्ता का जीवन परिचय |  नाम: डॉ. भगवानलाल गुप्त जन्म: 24 दिसंबर, 1914  स्थान: आज़मगढ़, भारत निधन: 29 जुलाई, 2001  स्थान: मुंबई, भारत भगवानीलाल गुप्ता का जीवन परिचय | डॉ भगवानीलाल गुप्त भारत के स्वतंत्रता संग्राम-संग्राम सेनानी, मुद्राशास्त्री, इतिहासकार एवं हिंदी वैज्ञानिक थे। भगवानीलाल गुप्त का जन्म 24 दिसम्बर, 1914 को उत्तर प्रदेश के नरकंकाल में हुआ था। और मृत्यु 29 जुलाई, 2001 को हुई। यूनिक एजुकेशन इन होमनगर के वेस्ली हाई स्कूल में हुई। 1930 में एक स्थानीय राजनीतिक आंदोलन में शामिल होने के कारण उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया, जिससे उनकी शिक्षा बाधित हो गई। उन्होंने स्थानीय समाचार निर्माताओं के लिए हिंदी मनोविज्ञान का रुख अपनाया। इसी दौरान, भारतीय पुरावशेषों के स्थानीय संग्रहकर्ता, अधिवक्ता रामा शंकर रावत ने एक अज्ञात नाम से उन्हें भारतीय मुद्राशास्त्र के अध्ययन से परिचित कराया। उन्होंने एक ही विश्वविद्यालय से स्नातक और स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी में प्राचीन भारतीय इतिहास और संस्कृति म...

पन्नालाल बारुपाल का जीवन परिचय | Pannalal Barupal ka jivan prichay |

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  पन्नालाल बारुपाल का जीवन परिचय | पन्नालाल बारूपाल का जीवन परिचय |  नाम: पन्नालाल बारुपाल जन्म: 6 अप्रैल, 1913 स्थान: वितरण, भारत निधन: 19 मई, 1983,  स्थान: श्री गंगानगर, भारत पेशा: द्वितीय पन्नालाल बारुपाल का जीवन परिचय।  पन्नालाल बारुपाल एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, भारतीय स्वतंत्रता कार्यकर्ता और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस राजनीतिक दल के सदस्य थे। 1952 से 1977 के बीच पाँचवीं बार राजस्थान राज्य में गंगानगर विद्युत क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले लोक सभा के सदस्य थे। उनका जन्म 6 अप्रैल, 1913 को हुआ था और वे असहयोग आन्दोलन में सक्रिय रूप से भाग लिये थे। और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया था।  पन्नालाल बारुपाल की मृत्यु 19 मई 1983 को श्री गंगानगर, राजस्थान में हुई। भारत सरकार ने 28 अप्रैल 2006 को उनके सम्मान में एक डाक टिकट जारी किया। वे सुधारवादी संगठन मेघवाल सुधार सभा के संस्थापक थे।

मध्य प्रदेश की प्रथम राज्यपाल पट्टाभि सीता रामैया का जीवन परिचय

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मध्य प्रदेश की प्रथम राज्यपाल पट्टाभि सीता रामैया का जीवन परिचय | पट्टाभि सीतारमैया का जीवन परिचय |  नाम: पट्टभि सीतारमैया जन्म: 24 नवंबर, 1880  स्थान: गुंडुगोलानु, ब्रिटिश भारत मृत्यु: 17 दिसम्बर, 1959 स्थान: हैदराबाद, भारत शिक्षा: मद्रास  कॉलेज पूर्व पद: मध्य प्रदेश के राज्यपाल 1956-1957 पार्टी:. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस रचनाएँ: एन खद्दर, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, सिक्सटी इयर्स ऑव कांग्रेस, फ़ेडर्स एंड स्टोन्स, नेशनल एजुकेशन, भारतीय राष्ट्रीयता, पट्टाभी सीता रामैया का जीवन परिचय |  भोगराजू लीपाभि सीतारामैया आंध्र प्रदेश राज्य के एक स्वतंत्रता सेनानी और राजनीतिक नेता थे। वे मध्य प्रदेश के पहले राज्यपाल 1 नवंबर 1956 से 13 जून 1957 तक थे। उनकी टिप्पणियों में 'फेडर्स एंड स्टोन्स', 'द क्रियोल ऑफ कांग्रेस' और 'गांधी एंड गांधीवाद' शामिल हैं।  पट्टाभी सीता रामैया का जन्म आंध्र प्रदेश में 24 सितंबर 1880 को ईसावी को हुआ था। बी.ए. परीक्षा में आपका मेडिकल स्कोर अध्ययन। आपने मछलीपट्टनम में चिकित्साकार्य की स्थापना की, 1920 में महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन के समय आप स्व...

पंडित सुन्दर लाल का जीवन परिचय | Pandit Sundar Lal ka jivan prichay

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  पंडित सुन्दर लाल का जीवन परिचय | Pandit Sundar Lal ka jivan prichay |  पंडित सुन्दर लाल का जीवन परिचय | पंडित सुन्दर लाल कायस्थ भारत के पत्रकार, इतिहासकार तथा स्वतंत्रता-संग्राम सेनानी थे। पंडित सुन्दर लाल कायस्थ का जन्म उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले की गाँव खतौली के कायस्थ परिवार में 26 सितम्बर सन 1885 को तोताराम के घर में हुआ था। बचपन से ही देश को पराधीनता की बेड़ियों में जकड़े देख कर उनके दिल में भारत को आजादी दिलाने का जज्बा पैदा हुआ। वह कम आयु में ही परिवार को छोड़ प्रयाग चले गए और प्रयाग को कार्यस्थली बना कर आजादी की लड़ाई में कूद पड़े। पंडित सुन्दर लाल कायस्थ एक सशस्त्र क्रांतिकारी के रूप में गदर पार्टी से बनारस में संबद्ध हुए थे। लाला लाजपत राय, अरविन्द घोष, लोकमान्य तिलक के निकट संपर्क उनका हौसला बढ़ता गया और कलम से माध्यम से देशवासियों को आजाद भारत के सपने को साकार करने की हिम्मत दी। उनकी प्रखर लेखनी ने 1914 से 1915 में भारत की सरजमीं पर गदर पार्टी के सशस्त्र क्रांति के प्रयास और भारत की आजादी के लिए गदर पार्टी के क्रांतिकारियों के अनुपम बलिदानों का सजीव वर्णन क...

पंडित रामदहिन ओझा का जीवन परिचय | Pandit Ramdahin Ojha ka jivan prichay

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पंडित रामदहिन ओझा का जीवन परिचय | Pandit Ramdahin Ojha ka jivan prichay पंडित रामदहिन ओझा का जीवन परिचय | पंडित रामदहिन ओझा भारत के पत्रकार एवं स्वतन्त्रता सेनानी थे। माना जाता है कि असहयोग आन्दोलन में किसी पत्रकार की पहली शहादत पंडित रामदहिन ओझा की थी। रामदीन ओझा का जन्म 1901 में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के बांसडीह कस्बे में हुआ था। बांसडीह कस्बे में ही प्रारम्भिक शिक्षा के बाद रामदहिन ओझा के पिता रामसूचित ओझा उन्हें आगे की शिक्षा के लिए कलकत्ता ले गये। वहां बीस वर्ष की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते पत्रकार रामदहिन ओझा की कलकत्ता और बलिया में स्वतंत्रता योद्धाओं और सुधी राष्ट्रसेवियों के बीच पहचान बन चुकी थी। कलकत्ता के 'विश्वमित्र', 'मारवाणी अग्रवाल' आदि पत्र-पत्रिकाओं में कुछ स्पष्ट नाम तो कुछ उपनाम से उनके लेख और कविताएं छपने लगी थीं। उन्होंने कलकत्ता, बलिया, और गाजीपुर की भूमि को सामान्य रूप से अपना कार्यक्षेत्र बनाया। ओझा अपनी लेखनी और आजादी के लिए जन आंदोलन में भाषणों के आरोप में कई बार गिरफ्तार किए गये। अपनी क्रांतिकारी गतिविधि के चलते पंडित रामदहिन ओझा को बंगाल और...

नीरा आर्य का जीवन परिचय | Neera Arya ka jivan prichay

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नीरा आर्य का जीवन परिचय | Neera Arya ka jivan prichay  नीरा आर्य का जीवन परिचय  नीरा आर्य आजाद हिन्द फौज में रानी झांसी रेजिमेंट की सिपाही थीं। जिन पर अंग्रेजी सरकार ने गुप्तचर होने का आरोप भी लगाया था। इन्हें 'नीरा ​नागिनी' के नाम से भी जाना जाता है। नीरा आर्य का जन्म 5 मार्च 1902 को तत्कालीन संयुक्त प्रांत के खेकड़ा नगर में हुआ था। वर्तमान में खेकड़ा भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में बागपत जिले का एक शहर हैं। इनके धर्मपिता सेठ छज्जूमल अपने समय के एक प्रतिष्ठित व्यापारी थे। जिनका व्यापार देशभर में फैला हुआ था। खासकर कलकत्ता में इनके पिताजी के व्यापार का मुख्य केंद्र था। इनके धर्म पिता छज्जूमल ने इनकी प्रारम्भिक शिक्षा का प्रबंध कलकत्ता के निकट भगवानपुर ग्राम में किया था। नीरा के प्रारम्भिक शिक्षक का नाम बनी घोष था, जिन्होंने उन्हें संस्कृत का ज्ञान दिया। बाद की शिक्षा कलकत्ता शहर में हुई। नीरा आर्य हिन्दी, अंग्रेजी, बंगाली के साथ-साथ कई अन्य भाषाओं में भी प्रवीण थीं। इनकी शादी ब्रिटिश भारत में सीआईडी इंस्पेक्टर श्रीकांत जयरंजन दास के संग हुई थी। श्रीकांत जयरंजन दास अंग्रेज भक्त ...

निरंजन सिंह गिल का जीवन परिचय | Niranjan Singh Gill ka jivan prichay

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निरंजन सिंह गिल का जीवन परिचय | Niranjan Singh Gill ka jivan prichay  निरंजन सिंह गिल का जीवन परिचय |भारत के स्वतन्त्रता सेनानी और राजनयिक थे। सन 1943 में इंडिअन नेशनल आर्मी के स्थापना में इनकी भी महत्वपूर्ण भूमिका थी। निरंजन सिंह गिल का जन्म सन 15 जनवरी, 1906 में अमृतसर के पास एक जमींदार सिख परिवार में हुआ था। उन्होंने लाहौर के एचेसन चीफ्स कॉलेज, देहरादून के राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज और रॉयल मिलिट्री अकादमी सैंडहर्स्ट में पढ़ाई की। ब्रिटिश भारतीय सेना में वह पहले 7वीं कैवलरी रेजिमेंट में थे और बाद में हैदराबाद रेजिमेंट में थे। जिसे 1942 में सिंगापुर की लड़ाई के बाद जापानियों ने बंदी बना लिया था। वहां उन्होंने आत्मरक्षा बलों को भारतीय राष्ट्रीय सेना की स्थापना में मदद की। सन 1945 में जापानियों की पराजय के बाद 15 अगस्त, 1945 के बाद अंग्रेजों द्वारा उन्हें नई दिल्ली के लाल किले में अस्थायी रूप से कैद कर दिया गया। जब 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतन्त्र हुआ तब उन्हें 'स्वतन्त्रता सेनानी' घोषित किया गया। इसके बाद वे 11 वर्षों तक इथियोपिया, थाइलैंड, और मैक्सिको में भारत के राजदूत...

नारायणी देवी वर्मा का जीवन परिचय | Narayani Devi Verma ka jivan prichay

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नारायणी देवी वर्मा का जीवन परिचय | Narayani Devi Verma ka jivan prichay  श्रीमती नारायणी देवी वर्मा भारतीय स्वतंत्रता सेनानी एवं सामाजिक कार्यकर्ता थीं। वे महान स्वतंत्रता सेनानी माणिक्यलाल वर्मा की पत्नी थीं। नारायणी देवी का जन्म सिंगोली गाँव में हुआ था जो वर्तमान समय में मध्य प्रदेश में है। उनके पिता का नाम रामसहाय भटनागर था। बारह वर्ष की अल्पायु में ही उनका विवाह माणिक्यलाल वर्मा के साथ कर दिया गया। किसानों व आम जनता पर राजा जागीरदारों के अत्याचार देखकर माणिक्यलाल वर्मा ने आजीवन किसानों, दलितों व गरीबों को सेवा का संकल्प लिया तो नारायणी देवी इस व्रत में उनकी सहयोगिनी बनीं। माणिक्यलाल वर्मा के जेल जाने पर परिवार के पालन-पोषण के साथ ही नारायणी देवी ने घर-मोहल्लों में जाकर लोगों को पढ़ाना एवं शोषण के खिलाफ महिलाओं को तैयार करने के कार्य किये। वे अपनी सहयोगिनियों के साथ घर-घर जागृति संदेश पहुँचातीं और लोगों को बेगार, नशा प्रथा एवं बाल-विवाह के विरुद्ध आवाज उठाने एवं संगठित होकर कार्य करने की प्रेरणा देतीं।उन्होंने डूंगरपुर रियासत में खड़लाई में भीलों के मध्य शिक्षा प्रसार द्वारा जा...

नारायण दामोदर सावरकर का जीवन परिचय Narayan Damodar Savarkar ka jivan prichay

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  नारायण दामोदर सावरकर का जीवन परिचय Narayan Damodar Savarkar ka jivan prichay  नारायण दामोदर सावरकर प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर के छोटे भाई थे। इनका जन्म 25 मई,1888 को हुआ था। ये व्यवसाय से दन्त-चिकित्सक थे। इन्होंने अपने दोनों बड़े भ्राताओं को जेल से छुड़ाने के लिए अथक प्रयास किए। ये नासिक में क्रांतिकारी गतिविधियों में भी सक्रिय रहे। इन्होंने स्वामी श्रद्धानंद की स्मृति में श्रद्धानन्द साप्ताहिक का तीन वर्षों तक प्रकाशन किया। ये मुम्बई की हिन्दू महासभा के सक्रिय व वरिष्ठ कार्यकर्ता रहे। तथा बाद में कुछ वर्षों के लिए अध्यक्ष भी रहे। मुंबई में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रथम शाखा इन्ही के दवाखाने में आरम्भ हुई थी। गांधी हत्याकाण्ड के उपरांत जब बम्बई प्रेसीडेंसी में ब्राह्मणों के खिलाफ दंगे हुए। तब उसी दौरान भीड़ द्वारा की गई पत्थरबाजी से उनको चोट पोहची थी। अंततः लगभग डेढ़ साल बाद 19 अक्टूबर, 1949 को उनकी मृत्यु हुई।

भारतीय स्वतन्त्रता के प्रथम संग्राम के शिल्पकार नाना साहेब का जीवन परिचय Nana Saheb ka jeevan parichay |

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  भारतीय स्वतन्त्रता के प्रथम संग्राम के शिल्पकार नाना साहेब का जीवन परिचय Nana Saheb ka jeevan parichay |  नाम: नाना साहेब (नानाराव) जन्म: 19 मई 1824 ई. स्थान: वेणगाव,‌ कर्जत, महाराष्ट्र मृत्यु: 24 सितम्बर 1859 ई. पिता: नारायण भट  माता: गंगा बाई पालक पिता: बाजीराव द्वितीय प्रसिद्धि: पेशवा, स्वतंत्रता सेनानी नाना साहेब का जीवन परिचय। नाना साहेब सन 1857 के भारतीय स्वतन्त्रता के प्रथम संग्राम के शिल्पकार थे। उनका मूल नाम 'धोंडूपन्त' था। स्वतन्त्रता संग्राम में नाना साहेब ने कानपुर में अंग्रेजों के विरुद्ध नेतृत्व किया। नानासाहेब धोंडोपंत पेशवा ने 19 मई 1824 को महाराष्ट्र के वेणगाव, कर्जत के निवासी माधवराव नारायण भट्ट तथा मैनावती के घर जन्म लिया था। इनके पिता पेशवा बाजीराव द्वितीय के सगोत्र भाई थे। पेशवा ने बालक नानाराव को अपना दत्तक पुत्र स्वीकार किया और उनकी शिक्षा दीक्षा का यथेष्ट प्रबन्ध किया। उन्हें हाथी घोड़े की सवारी, तलवार व बन्दूक चलाने की विधि सिखाई गई और कई भाषाओं का अच्छा ज्ञान भी कराया गया। 28 जनवरी 1851 ई। को पेशवा ...

पंडित नरेन्द्र प्रसाद सक्सेना का जीवन परिचय | Narendra Prasad Saxena ka jeevan parichay

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पंडित नरेन्द्र प्रसाद सक्सेना का जीवन परिचय | Narendra Prasad Saxena ka jeevan parichay    नाम : पंडित नरेन्द्र प्रसाद सक्सेना जन्म: 10 अप्रैल 1907 ई. स्थान: हैदराबाद मृत्यु: 24 सितंबर 1976 ई. पिता: राय केशव प्रसाद  माता: गुणवंती पंडित नरेन्द्र प्रसाद सक्सेना का जीवन परिचय । पंडित नरेन्द्र प्रसाद सक्सेना प्रसिद्ध आर्य समाजी थे। जिन्होने हैदराबाद की निजामशाही के विरुद्ध बहुत संघर्ष किया। वे 'पण्डित सोमानन्द सक्सेना' के नाम से प्रसिद्ध थे। नरेन्द्र प्रसाद सक्सेना का हैदराबाद नगर में 10 अप्रैल 1907 को सक्सेना कायस्थ परिवार में एक प्राणवीर का जन्म हुआ। आगे चलकर जिसने निरंकुश निज़ाम तथा रज़ाकारों को घुटने टेकने के लिए बाध्य किया। उस शिशु का नाम रखा गया नरेन्द्र प्रसाद सक्सेना। पिता राय केशव प्रसाद निज़ाम सरकार में मनसबदार थे। माता गुणवंती, राय बंसीधर की सुपुत्री थी। नरेन्द्र के मातापिता के वंशज उत्तर भारत से हैदराबाद आ गए थे।  पण्डित नेरन्द्र जी का बहुत सारा जीवन जेल में बीता उनका हर एक त्योहार जेल की चार दीवारी में बीता। पं नरेन्द्र की ...

नरिमन प्रिंटर्स का जीवन परिचय | Nariman Printers ka jeevan parichay

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  नरीमान प्रिन्टर का जीवन परिचय | Nariman Printers ka jeevan parichay  नरिमन प्रिंटर्स का जीवन परिचय। नरीमन अदरबाद प्रिंटर  एक भारतीय शौकिया रेडियो ऑपरेटर थे। जिन्हें कांग्रेस रेडियो की स्थापना के लिए जाना जाता है । 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध छिड़ने के साथ ही अंग्रेजों ने नए लाइसेंस जारी करना बंद कर दिया। सभी शौकिया रेडियो संचालकों को लिखित आदेश भेजकर अपने प्रसारण उपकरण पुलिस को सौंपने के लिए कहा गया ताकि युद्ध में इनका इस्तेमाल संभव हो सके और साथ ही धुरी राष्ट्रों के सहयोगियों और जासूसों द्वारा स्टेशनों का चोरी-छिपे इस्तेमाल होने से भी रोका जा सके। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के जोर पकड़ने के साथ ही, 1940 में प्रिंटर ने गांधीवादी विरोध संगीत और बिना सेंसर की आर्थिक खबरें प्रसारित करने के लिए आज़ाद हिंद रेडियो की स्थापना की । उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया और उनके उपकरण जब्त कर लिए गए। अगस्त 1942 में, महात्मा गांधी द्वारा भारत छोड़ो आंदोलन शुरू करने के बाद , अंग्रेजों ने भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों पर...

नरहरि परीख का जीवन परिचय ।narahari pareekh ka jeevan parichay

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नरहरि परीख का जीवन परिचय ।narahari pareekh ka jeevan parichay |  नाम: नरहरि परीख जन्म: 17 अक्टूबर 1891 ई. स्थान: अहमदाबाद, गुजरात मृत्यु: 15 जुलाई 1957 ई. पत्नी: मनिबेन, बच्चे: वनमाला, मोहन  स्थान: स्वराज आश्रम बारदोली पेशा: लेखक, कार्यकर्ता एवं समाज सुधारक भाषा: गुजराती, राष्ट्रीयता: भारतीय शिक्षा: स्नातक तथा क़ानून की डिग्री प्रसिद्धि: स्वतंत्रता सेनानी जेल यात्रा: घरसाना के 'नमक सत्याग्रह' में सम्मिलित होने पर नरहरि पारिख को लाठियों से पीटा गया और तीन वर्ष की कैद की सज़ा हुई। नरहरि परीख का जीवन परिचय। नरहरि द्वारकादास परीख भारत के एक लेखक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और समाजसुधारक थे। नरहरि परीख का जन्म 7 अक्टूबर, 1891 ईस्वी को गुजरात के अहमदाबाद में हुआ था। उनका परिवार कथलाल, खेड़ा जिले से था। उन्होंने अहमदाबाद में अध्ययन किया और 1906 में मैट्रिक उतीर्ण किया। 1911 में उन्होंने 'गुजरात कॉलेज' से इतिहास और अर्थशास्त्र में बी ए किया। तथा कला स्नातक और फिर मुम्बई से क़ानून की डिग्री प्राप्त की। 1913 में उन्होंने अपने मित्र...

नरहर विष्णु गाडगील का जीवन परिचय | Narhar Vishnu Gadgil ka jeevan parichay

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  Narhar Vishnu Gadgil ka jivan parichay | नरहर विष्णु गाडगील का जीवन परिचय  जन्म: 10 जनवरी, 1896, ई. स्थान: मल्हारगढ़, महाराष्ट्र भारत मृत्यु: 12 जनवरी, 1966 ई. शिक्षा: फर्ग्यूसन कॉलेज पूर्व पद: पंजाब के राज्यपाल (1958-1962), भारत के ऊर्जा मंत्री (1947-1950) बच्चे: विट्ठलराव गाडगिल पुस्तकें: समग्र काका: अंदर से सरकार , समग्र काका: मृत्यु कर्तव्यों में अध्ययन पार्टी: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस प्रसिद्धि: स्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिज्ञ, लेखक पद: राज्यपाल, पंजाब - 15 सितम्बर, 1958 से 1 अक्टूबर, 1962 ऊर्जा मंत्री, नेहरू मंत्रिमंडल - 15 अगस्त, 1947 से 12 दिसम्बर, 1950 नरहर विष्णु गाडगील का जीवन परिचय । नरहर विष्णु गाडगिल भारत के एक राजनेता,  अर्थशास्त्री, लेखक व भारतीय स्वतंत्रता-संग्राम सेनानी और भारतीय संविधान सभा के सदस्य थे। उन्होंने स्वतन्त्र भारत के प्रथम नेहरू मन्त्रिमण्डल में ऊर्जा मंत्री के रूप में कार्य किया। नरहर विष्णु गाडगिल का जन्म 10 ज...

नरसिंह चिंतामण केलकर का जीवन परिचय | narasimha chintaman kelkar ka jivan parichay |

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  नरसिंह चिंतामण केलकर या तात्यासाहेब केलकर का जीवन परिचय | Tatyasaheb Ketkar ka jeevan parichay |  नाम: नरसिंह चिंतामण केलकर  उपनाम: साहित्यसम्राट तात्यासाहेब केळकर जन्म: 24 अगस्त 1872 ई.मिराज,महाराष्ट्र  मृत्यु: 14 अक्टूबर 1947 ई. पुणे,भारत शिक्षा: डेक्कन कॉलेज पोस्ट ग्रेजुएट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, राजाराम कॉलेज व्यवसाय: राजनीतिज्ञ, वकील, संपादक, उपन्यासकार, इतिहासकार राजनीतिक दल: हिंदू महासभा, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस  आंदोलन: भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन साहित्यिक रचनाएं:- खेल: सरोजिनी  1901, चंद्रगुप्त 1913, टोटायाचे बैंड 1913, कृष्णार्जुन यद्ध  1915, संत भानुदास 1919, उपन्यास: अंधर्वद  1928, बलिदान 1937, कोकांचा पोर  1942, लघु कथाएँ: कुशा विशी अनी इतर गोष्ठी 1950, कविता: काव्योपहार 1927, पद्यगुच्छा 1936, इतिहास: मराठे वा इंग्रज 1918, इतिहास विहार 1926, फ्रांसीसी राज्यक्रांति 1937, दर्शन: गवरन गीता  1944, ज्ञानेश्वरी सर्वस्व 1946, राजनीतिक लेखन: भारतीय स्वशासन का मामला ...

ननिबाला देवी का जीवन परिचय | nanibaala devee ka jeevan parichay

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  ननिबाला देवी का जीवन परिचय | nanibaala devee ka jeevan parichay  ननिबाला देवी का जीवन परिचय। ननिबाला देवी एक प्रसिद्ध क्रांतिकारी थी। प्रसिद्ध क्रांतिकारी ननिबाला देवी का जन्म 1888 ई. में हावड़ा में हुआ था। साधारण शिक्षा घर में हुई और 11 वर्ष की उम्र में उनका विवाह कर दिया गया। किन्तु विवाह के 5 वर्ष के बाद ही वे विधवा हो गईं। अब उन्होंने अपना ध्यान अध्ययन की ओर लगाया और ईसाई मिशन के स्कूल में अंग्रेजी की शिक्षा प्राप्त की। परंतु विचार संबंधी मतभेदों के कारण उन्हें मिशन छोड़ देना पड़ा। इसके बाद वे अपने दूर के भतीजे अमरेन्द्र नाथ चट्टोपाध्याय के संपर्क में आईं। अमरेन्द्र प्रसिद्ध क्रांतिकारी संगठन युगांतर पार्टी के प्रमुख नेता थे। इसके बाद ननिबाला देवी क्रांतिकारी संगठन में सम्मलित हो गईं। प्रथम विश्वयुद्ध के दिनों में वे भूमिगत क्रांतिकारियों के लिए भोजन आदि की व्यवस्था करती रहीं। बीसवीं सदी के दूसरे दशक में ननिबाला देवी कलकत्ता, चन्द्रनगर व चटगाँव आदि नगरों में क्रांतिकारियों को आश्रय देने, उनके अस्त्र-शस्त्र रखने एवं गुप्तचर पुलिस को चकमा देने के कारण प्रसि...

नगेन्द्र बाला का जीवन परिचय | Nagendra Bala ka jeevan parichay

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  नगेन्द्र बाला का जीवन परिचय | Nagendra Bala ka jeevan parichay |  नगेन्द्र बाला का जीवन परिचय  नगेन्द्र बाला भारत की प्रसिद्ध महिला स्वतंत्रता सेनानी थीं। वे देश में ज़िला प्रमुख बनने वाली प्रथम महिला थीं। नगेन्द्र बाला का जन्म 13 सितंबर , 1926 को हुआ था। वे प्रसिद्ध क्रान्तिकारी केसरी सिंह बारहठ की पौत्री और प्रताप सिंह बारहठ की भतीजी थीं।  वे दो बार विधायक के पद पर भी रहीं। उन्होंने 1941 से 1945 तक किसान आन्दोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। नगेन्द्र बाला राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र की पहली महिला थीं, जिन्होंने महिलाओं में राष्ट्रीय चेतना का प्रसार किया। वह सदैव महिला कल्याण कार्यों से जुड़ी रहीं। उनकी शुरू से ही जनसेवा, राजनीति और महिला उत्थान जैसे कार्यों में विशेष रुचि रही थी स्वाधीनता संग्राम में सहभागिता वर्ष 1942 के स्वाधीनता आंदोलन में नगेन्द्र बाला ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के निधन पर वे दिल्ली से अस्थि कलश लेकर कोटा आईं और चम्बल नदी में उनकी अस्थियां विसर्जित की। कार्य पंचायती राज व्यवस्था लागू होने के बाद नगेन्द्र बाला वर्ष 1960 में को...

धर्मनाथ अग्रहरि का जीवन परिचय | dharmanaath agrahari ka jeevan parichay |

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 धर्मनाथ अग्रहरि का जीवन परिचय | dharmanaath agrahari ka jeevan parichay |  धर्मनाथ अग्रहरि का जीवन परिचय  धर्मनाथ अग्रहरि बिहार राज्य से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थें। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान तत्कालीन छपरा जिलें के ब्रिटिश दुश्मनो के छक्के छुड़ाने वाले भारतीय रणबांकुरो मे से आप एक थें। धर्मनाथ अग्रहरी को 1942 में महात्मा गाँधी के भारत छोड़ो आंदोलन मे सक्रिय सहभागिता हेतु जाना गया। आपके पिता का नाम स्वर्गीय सरयू प्रसाद था तथा आप बिहार प्रांत के सिवान मे चैनपुर, महावीर चौक के निवासी थें। दिनाँक 3 अक्टूबर 2008 को भारत माँ के वीर सपूत स्वतंत्रता सेनानी धर्मनाथ अग्रहरि का देहांत चैनपुर के ही एक निजी नर्सिंग होम मे हुआ। उनका अंतिम संस्कार सरयू नदी के तट पर किया गया।